पहचान

>> Friday, April 24, 2009



मेरा नाम माहे परवीन है ...... 
मैं लखनऊ की रहने वाली हूं ...... 
मेरे लिए यह ब्लाग की दुनिया मेरे लिये बिलकुल नयी है ....... 
आज पहली बार कुछ लिखने की कोशिश कर रही हूं .......
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अपनी पहचान
 
आज हर आदमी अपनी पहचान को भूलता जा रहा है ?
क्योकि वह केवल अपने आप मे जी रहा है,
और पैसे को पाने की दौड़ मे शामिल है,
मगर जब तक होश आऐगा तब देर हो चुकेगी पर आज क्या ?
आज तो उसको आराम की जिन्दगी मिल रही है 
और कल उसके बच्चे को क्या मिलेगा उसे तो पता है
हमने अपने लिए और बच्चो के लिऐ पैसो का समंदर बना लिया 
जो हमेशा ही रहेगा पर आदमी ये नही जानता की पहचान को भूलकर कुछ भी 
प्राप्त कर लेना जीवन के सत्य का अन्त है ।

8 comments:

Anonymous April 29, 2009 at 10:57 PM  

Alpana Verma :

बहुत अच्छा लिखा है माहे जी ,आप ने.
यह प्राथना करते बच्चे की तस्वीर बहुत प्यारी है.
स्वागत है ब्लॉग की दुनिया में..
शुक्रिया मेरे ब्लॉग पर आप आईं और शुभकामनायें दी.

aap ka comment click karne par koi comment box nahin aata..is liye email likh rahi hun.

Anonymous April 29, 2009 at 10:59 PM  

Harkirat Kalsi :

Praveen ji,

aapka swagat hai... par aapne comt box nahin lgaya use lga len tabhi koi comt kar payega.

Anonymous April 29, 2009 at 11:00 PM  

सुश्री माहे जी, सादर अभिवादन,

आपकी रचना अपनी पहचान पढी.

मगर जब तक होश आऐगा तब देर हो चुकेगी पर आज क्या ?
आज तो उसको आराम की जिन्दगी मिल रही है

रचना बहुत सुंदर है. शुभकामनाएं.

आपके ब्लाग पर टिपणी बाक्स नही खुल रहा है. कृपया इसे आन करें.

इस प्रथम पोस्टिंग पर बहुत बहुत शुभकामनाएं.

ताऊ रामपुरिया

--
शुभकामनाओं सहित

पी.सी.रामपुरिया (मुदगल)

admin May 1, 2009 at 1:12 AM  

बडे तो बडे, अब बच्चे भी ब्लॉगर हो गये हैं।
ये जानकर खुशी हुई कि आप लखनउ की हैं, मैं भी लखनउवा हूं, न। इसलिए मैं भी आपका अंकल हुआ। तो अंकल की तरफ से आपके लिए ढेर सारा प्यार।
----------
सावधान हो जाइये
कार्ल फ्रेडरिक गॉस

Tarun May 1, 2009 at 11:59 AM  

swagat hai...aur abhi to ye pehla hi kadam hai.....Pehchan banni baaki hai.

Baaki duniya ke baare me jo likha hai.....to yehan sabhi dorne bhagne me lage hain.

"MIRACLE" May 26, 2009 at 2:52 AM  

blog ki duniya bahut pyari hai isme aapka swgat hai.jo man mai aye achehe se likh de blog ki duniya mai likhne se hi to rishteon bante chale jate hai.

Akanksha Yadav June 16, 2009 at 12:02 PM  

पहली बार ही सही पर अंतर्मन से लिखा आपने.
सुन्दर भावों की अभिव्यक्ति से भरी रचना...बधाई.
__________________________________
मेरे ब्लॉग "शब्द-शिखर" पर पढें 'ईव-टीजिंग और ड्रेस कोड'' एवं अपनी राय दें.

vijay kumar sappatti August 7, 2009 at 8:50 AM  

bahut acha likha hai ji . yun hi likhte rahiye... badhai sweekar karen...

vijay

pls read my new poem "झील" on my poem blog " http://poemsofvijay.blogspot.com

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